Condiments & Chutneys
🟢 कम तेल
टमाटर-प्याज़ की चटनी
कुंडी में हाथ से कुटी हुई, ताज़ी और तीखी - माँ की बिना पकाई हुई चटनी।
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तेल का उपयोग
कच्चे आम को छीलें और गुठली निकालें। गूदे को मोटे टुकड़ों में काटें। मरवा और पुदीने के पत्ते धोकर पानी झाड़ दें।
💡 सुझाव: आम को बारीक काटने की ज़रूरत नहीं है - कुंडी का काम करेगी। बड़े टुकड़े भी ठीक हैं।
सभी चीज़ें कुंडी में डाल दें — कच्चे आम के टुकड़े, मरवा के पत्ते, पुदीना, प्याज़ के टुकड़े, लाल मिर्च, देसी शक्कर और नमक। परत-दर-परत डालने की ज़रूरत नहीं — सब एक साथ जाएगा।
💡 सुझाव: मरवा (थाई तुलसी) इस चटनी को इसकी विशिष्ट सुगंध देती है - यह तुलसी के समान नहीं है। यदि आपको मरवा नहीं मिल सके, तो इसे बदलने के बजाय छोड़ दें। पुदीना अकेले काम करता है लेकिन उसमें गहराई की कमी होती है।
मूसल से सब कुछ अच्छे से कूटें। गोल घुमाते हुए दबाव से कूटते जाएँ। चटनी दरदरी रहनी चाहिए — मोटी, टुकड़ों वाली, थोड़ी खुरदरी। पेस्ट बनने से पहले रुक जाएँ। नमक और शक्कर चखकर ठीक करें।
💡 सुझाव: दर्दरा का मतलब है रूखा - चिकना होने से पहले ही रोक दें। आम का खट्टापन और जड़ी-बूटियों का तेल एक गाढ़ी चटनी में सबसे अच्छा आता है। यदि ब्लेंडर का उपयोग कर रहे हैं, तो बस 3-4 छोटे पल्स।
तुरंत परोसें। यह चटनी ताज़ी खाने में सबसे अच्छी लगती है — रखने पर आम की खटाई और पत्तों की खुशबू कम हो जाती है। रखना हो तो ढक कर 6 घंटे तक फ्रिज में रखें।
💡 सुझाव: बचा हुआ खाना अगली सुबह भी स्वादिष्ट होता है - रातोंरात स्वाद और गहरा हो जाता है - लेकिन रंग गहरा हो जाएगा और उतना जीवंत नहीं रहेगा।
प्रति सर्विंग (सर्विंग्स 3)
कुंडी में कूट कर बनाई गई कच्चे आम की ताज़ी चटनी — माँ की वो सुबह वाली चटनी, जो तब बनती है जब रात आँधी में पेड़ से आम गिर जाएँ। मरवा, पुदीना, प्याज़, देसी शक्कर और लाल मिर्च — सब मिलाकर दरदरा कूट लो। न पकाना, न तेल। बस जो सुबह मिले, उसी से।